!!!

Sunday, March 15, 2009

न ही अपनी मर्जी से मर पाया मैं।

मां एक याद
मां
ने
बहुत सरल
बहुत प्यारी
बहुत भोली
मां ने
बचपन में
मुझे
एक गलत
आदत सिखा दी थी
कि सोने से पहले
एक बार
बीते दिन पर
नजर डालो और
सोचो कि तुमने
दिन भर
क्या किया
बुरा या भला
सार्थक
या
निरर्थक
मां तो चली गई
सुदूर
क्षितिज के पार
और बन गई
एक तारा नया
इधर
जब रात उतरती है
और नींद की
गोली खाकर
जब भी
मैं सोने लगता हूं
तो
अचानक
एक झटका सा लगता है
और
मैं सोचते बैठ जाता हूं
कि दिन भर मैंने
क्या किया?कि
आज के दिन
मैं कितनी बार मरा
कितनी बार जिया
फिर जिया
इसका हिसाब
बड़ा उलझन भरा है
मेरा वजूद जाने कितनी बार मरा है
यह दिन भी बेकार गया
मैंने देखे
मरीज बहुत
ठीक भी हुए कई
पर नहीं है
यह बात नई
इसी तरह तमाम जिन्दगी गई
जो भी था मन में
जिसे भी माना
मैंने सार्थक
तमाम उम्र भर
वह आज भी नहीं कर पाया मैं
न तो कभी
अपनी मर्जी से जिया
न ही
अपनी मर्जी से मर पाया मैं।

13 comments:

  1. na apni marji se jiya, na apni marji se mara.

    bahut khoob sunder rachna

    ReplyDelete
  2. अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम थे

    ReplyDelete
  3. ब्लोगिंग जगत में स्वागत है ।
    लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
    सुन्दर रचना के लिए बधाई
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    www.rachanabharti.blogspot.com
    कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
    www.swapnil98.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर रचना. शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  5. आप तो सचमुच साहित्‍य के सखा हैं। भविष्‍य की शुभकामनाओं के साथ बधाई।

    ReplyDelete
  6. हृदय के तारों को छुने वाली रचना। बहुत खूब। कहते हैं कि-

    कहानी मेरी रूदादे जहां मालूम होती है।
    जो सुनता है, उसीकी दास्तां मालूम होती है।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

    ReplyDelete
  7. aadmi sone se pahale din par chintan manan kar le to bat ban jaye, narayan narayan

    ReplyDelete
  8. ब्लाग संसार में आपका स्वागत है। लेखन में निरंतरता बनाये रखकर हिन्दी भाषा के विकास में अपना योगदान दें।
    नये रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को shabdkar@gmail.com पर रचनायें भेज सहयोग करें।
    रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

    ReplyDelete
  9. मित्रो ! आप सभी का आभार रचना अपनाने के लिये। प्रोत्साहन सदा उर्जावान होता है ।
    श्याम सखा

    ReplyDelete
  10. dr sahab apne to sahitya walo ko mat de di.sabke sakha syam ji ko mera naman.

    ReplyDelete
  11. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

    ReplyDelete