!!!

Tuesday, February 9, 2010

बीमार कर सकती है टिप्पणी--सावधान हो जाएं

ब्लॉगिंग खुद को अभिव्यक्त करने का अच्छा साधन है
लेकिन हिदुस्तानी आदमी ने इसे टिप्पणीयों का साधन बना लिया है
और इसके कुपरिणाम भी आरम्भ हो गये हैं
मैं चिकित्सक हूं और मैने पाया है कि जो लोग टिप्पणी पाने के लिये टिप्पणी करने में जुटे हैं वे न केवल सार्थक अभिव्यक्ति से दूर हो रहे हैं-सार्थक पोस्ट न पढकर केवल टिपियाने में वक्त खराब कर रहे हैं ये लोग बिना पोस्ट पढे टिप्प्णी करते हैं और एवज में ऐसी ही टिप्पणी पाते हैं ,इसका उदाहरण आप एक विगेट से जो यह दर्शाता है कि आपके ब्लॉग पर लोग average वक्त कितना बिता रहे हैं इससे लग जाता है।
टिप्पणी ले दे के नुकसान अब स्वास्थ्य पर भी दिखने लगे हैं

जो लोग लाइफ़ स्टाइल बिमारियों से पीड़ीत हैं जैसे ब्लडप्रेशर,मधुमेह,अस्थमा,पेप्टिक अल्सर,अनिद्रा ,एन्गजाइटी.अवसाद या डिप्रेशन जैसे मानसिक रोग उनकी बिमारियां बढ जाती हैं .
पहले से अधिक दवा लेनी पड़ रही है,
अत: आप को आगाह किया जा रहा है टिपियाने को बिमारी न बना कर इसे भी सार्थक अभिव्यक्ति का साधन ही बनाए

इस बिमारी के लक्षण

१ पोस्ट करने के तुरन्त बाद भाग-भाग कर ब्लॉग पर आना कि कितनी टिप्पणी आईं
२-किसी खास व्यक्ति की टिप्पणी न आने पर उदास हो जाना-ऐसे समय मे आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा मिलेगा
३किसी पोस्ट पर कम टिप्पणी आने पर उदास व चिड़्चिड़ा हो जाना
४-मनपसन्द टिप्पणी न आने पर उदासी चिड़चिड़ापन
-नेगेटिव टिप्पणी आने पर गुस्सा होना
६-किसी ने आपकी रचना की कमी बतला दी तो पहले नाराज होना,फ़िर या तो उसके ब्लॉग जो आपका पसन्ददीदा ब्लॉग रहा था जाना छोड़ देना या जाना पढ़ना मगर टिप्पणी न करना-यह भी अपने आप में एक हीनभावना से ग्रस्त होना ही है जो आगे चलकरमानसिक अवसाद रोग का कारण बनेगा-अच्छी रचना पर कंजूसी न करें खुलकर टिप्पणी करें
इस रोग का सबसे भयंकर लक्षण है अनाम anonimous बनकर चुभती टिप्पणी करना-इससे जहां एक और टिप्पणी पाने वाले को अवसाद ग्रस्त कर रहे हैं ,वही आप खुद को मानसिक अवसाद की ओर धकेल रहे हैं
आप तो इस तरह गलत तरीके से टिप्पणी के व्यसन addiction से बचे और कुंठाग्रस्त होने से बचें।पसन्ददीदा ब्लॉग पढे अच्छा लगे तो सार्थक क्रियात्मक टिप्पणी से नवाजें अन्यथा पचड़े में न पड़ेअच्छी न लगे पोस्ट तो कतई टिप्पणी न करें न अच्छा बता बांस पर चढाए न बुरा कह कर किसी का दिल दुखाएं।
कई ब्लाग आप को सम्मानित करने हेतु बचकाने निरर्थक सवालों  के जवाब पूछते हैं उस में समय बरबाद न करें।
इसी तरह आपके कमेन्ट पर बहस में उल्झाने वाले लोग मिलेंगे उन से कतराकर निकलें।

दुनिया के सबसे प्रभावी मनस-शास्त्र गीता का अनुसरण करें यानि कर्म करें फल [टिप्पणी ] की इच्छा में न पड़े।।

10 comments:

  1. लोग टिप्पणी पाने के लिये टिप्पणी करने में जुटे हैं वे न केवल सार्थक अभिव्यक्ति से दूर हो रहे हैं-सार्थक पोस्ट न पढकर केवल टिपियाने में वक्त खराब कर रहे हैं ये लोग बिना पोस्ट पढे टिप्प्णी करते हैं और एवज में ऐसी ही टिप्पणी पाते हैं ,इसका उदाहरण आप एक विगेट से जो यह दर्शाता है कि आपके ब्लॉग पर लोग average वक्त कितना बिता रहे हैं .nice

    ReplyDelete
  2. Aapne bahut acchi jankari di hai.....aur yah bilkul satya hi lagata hai ki tippani karane ya pane ka aisa junoon nishchit hi mansik vishamtao ko janm deta hai !!
    Sadar
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

    ReplyDelete
  3. नेक सलाह दिया आपने डक्टर साहब। रोचक लगी यह पोस्ट।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. दुनिया के सबसे प्रभावी मनस-शास्त्र गीता का अनुसरण करें यानि कर्म करें फल [टिप्पणी ] की इच्छा में न पड़े

    -आज से यह शुरु! :)

    ReplyDelete
  5. सही बात है मगर हम तो बिना पढे टिप्पणी करते ही नहीं । धन्यवाद इस जानकारी के लिये। पढे बिना लिखना भी मुमकिन नही होता पुस्तकें और ब्लाग पढना ही चाहिये। मगर जब कोई ये आशा करता है कि उसे लोग पढें और अपनी प्रतिक्रिया दें तो जाहिर है दूसरा भी उस से यही आशा करेगा। तिप्पणी प्रेरणा देने के साथ साथ पठकों की प्रतिक्रियाओं से उस पोस्ट मे सुधार करने का अवसर भी देती है। इस लिये टिप्पणी करना और पाना आपके समय और सुविधा के अनुसार होता है। आपको केवल पढ कर ही लोग चले जायें आपको क्या पता चलेगा कि आपने जो लिखा है वो कैसा है अगर हमे 10 टिप्पणी भी आती हैं तो उन मे 5 तो होंगे जिन्हों ने पढा होगा बाकी आपकी रचना पर निर्भर करता है। हाँ जब अच्छी पोस्ट पर टिप्पणी नही आती तब दुख जरूर होता है। आलेख अच्छा लगा धन्यवाद्

    ReplyDelete
  6. निर्मला जी
    मैने ब्लॉगिंग पर रोगी बन रहे लोगों को आगाह किया है सभी लोग ऐसे नहीं है ब्लॉग पर बहुत सारे गुणी लोग भी हैं
    मेरा कहना मात्र इतना है कि खामखा घटिया रचना की बड़ाई केवल इसलिये न करें कि वो आपकी बड़ाई करेगा
    गज़ल लेखन पर तो तथाकथित गुरू अधकचरी रचनाओं की प्रसंशा कर लेखक को बांस पर चढ़ाकर उसे मीर गालिब सरीखा बताकर उस व्यक्ति का नुकसान ही कर रहे हैं बुरा न माने मैने आपकी कुछ रचनाओं पर भी ऐसी टिप्पणियां देखी हैं-आप तो तथाकथित गुरु की टिप्पणी से निहाल हो जाएंगे पर आप फ़िर बेहतर न कर पाएंगे-यह जान लें।आप्की ऐसी ही दो गज़लों पर मैने आपके अनुरोध पर कुछ सलाह दी थी गज़ल को बेहतर बनाने के लिये जिसे आपने स्वीकार भी किया था।कुछ और लोगों ने भी सलाह मांगा उनकी गज़ल की कमी बताने से वे नाराज हो भाग गये मेरे ब्लॉग से,
    जबकि मेरे ब्लॉग पर अनेक आप सरीखे पारखी सहृद्‌य लोग हैं जो मेरी निरन्तर पढ़ते सराहते व कमी भी बताते हैं और मैं उन कमियों को दूर तो करता ही हूं ब्लाग पर इन मित्रों का नाम देकर आभार भी प्रगट करता रहा हूं

    ReplyDelete
  7. जनाब श्याम सखा जी,

    बेहतरीन पोस्ट के लिए शुक्रिया !
    अपनी बात करू तो इस खादिम का पुराना वसूल है की रचना जिस किसी ब्लोगर की हो वो यदि अपने निश्चित मानदंडो पर खरी उतरती हो तो उसे पुरे तसल्ली से पुख्त्सा टिपण्णी जरूर देंगे और जो लिखेंगे वो निचोड़ ही होगा ना की वाहियात सी बेतुकी कोइ बात /
    बांकी , ये आपने भला काम अंजाम दिया की लोग्बागो की तवज्जो उन जानमारू नामुराद रोगों की ओर खींचा जो ख़ुशी-ख़ुशी गले पड़ने को तैयार बैठे है /
    सब्बाखैर !

    ReplyDelete
  8. बहुत कुछ कहती यह पोस्‍ट वास्‍तव में सत्‍यता बयान कर रही है, आभार ।

    ReplyDelete
  9. hmm sochne wali baat to hai...sahi kaha sameer ji ne ..bas karm karo ,fal ( tippani) ki iksha mat karo

    ReplyDelete