
प्रश्न उठा
दुख: का सागर
है अपार
कठिन है
जाना इसके पार
समाधान गुना
तो छोड़
कश्ती को मझधार
अपना लहरों को
कर तूफानों से प्यार
दोस्तो,मैं इस ब्लाग पर अपनी प्रकाशित रचनाएं/ कविता कहानी तथा गीत आदि पोस्ट करता हूं ज़े सभी रचनाएं पुस्तक रूप में एवम अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं अत: इनका कापी राइट मेरे पास है.इन्हे कहीं उद्धृत करने के लिये आप अनुमति ले सकते हैं-श्याम सखा श्याम
बहुत सुंदर विचार हैं आपके। बधाई।
ReplyDelete-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
वाकई उम्दा विचार .
ReplyDeletebahut sahi kaha aapne.....
ReplyDeleteसुन्दर विकल्प है और यही एक विकल्प भी है।
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