आदत से मजबूर
मुझे
एक आदत
सी हो गई है
दुख उठाने की
अपने गम
नहीं होते हैं

तो ले आता हूं
रकीबों से उधार।
2
आदतें
आदतें
पुरानी
हों
कि
नईं
कब
गईं

10ण्4ण्1992
11ण्43 रात्रि
klik here for
दोस्तो,मैं इस ब्लाग पर अपनी प्रकाशित रचनाएं/ कविता कहानी तथा गीत आदि पोस्ट करता हूं ज़े सभी रचनाएं पुस्तक रूप में एवम अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं अत: इनका कापी राइट मेरे पास है.इन्हे कहीं उद्धृत करने के लिये आप अनुमति ले सकते हैं-श्याम सखा श्याम
बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए....
ReplyDeleteमन को छू गये आपके भाव।
इससे ज्यादा और क्या कहूं।
बहुत कुछ चन्द शब्दों में व्यक्त किया, आभार ।
१. अति सुंदर २. सुंदर
ReplyDeletelलाजवाब है बधाई
ReplyDeletebahut sundar bhav hai..
ReplyDeleteaashu
aadate to aadate hi he, kya purani kyaa nai..
ReplyDeletekintu janaab aapke kahne ka andaaz niralaaa he..,