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Saturday, December 12, 2009

रकीबों से उधार

१
आदत
से मजबूर

मुझे
एक आदत
सी
हो गई है
दुख उठाने की
अपने गम
नहीं होते हैं



तो ले आता हूं
रकीबों से उधार।

2
आदतें
आदतें
पुरानी
हों
कि
नईं
कब
गईं



10ण्4ण्1992
11ण्43 रात्रि

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पुराना शे‘र नई बहर में--श्याम सखा

5 comments:

  1. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए....
    मन को छू गये आपके भाव।
    इससे ज्यादा और क्या कहूं।
    बहुत कुछ चन्‍द शब्‍दों में व्‍यक्‍त किया, आभार ।

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  2. १. अति सुंदर २. सुंदर

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  3. aadate to aadate hi he, kya purani kyaa nai..
    kintu janaab aapke kahne ka andaaz niralaaa he..,

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