इस
गूंगेपन से
बहुत फायदा हुआ है
मुझको
कि मौलवी की
अजान की जगह
खुदा
सुनता है दास्तां मेरी
हर सप्ताह मेरी एक नई गज़ल व एक फ़ुटकर शे‘र हेतु
http://gazalkbahane.blogspot.com/
Wednesday, March 31, 2010
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वाह एक नए अंदाज़ में बेहतरीन प्रस्तुती!
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